This blog contains some poems,shayris and songs written by me. It also contains certain songs, ghazals and shayris from hindi films as well as hindi/english pop music. Enjoy !!
Friday, February 24, 2017
Tuesday, January 31, 2017
आया हैं सरहद पे जवाँ
आया हैं सरहद पे जवाँ,
आया हैं सरहद पे जवाँ , मीट जाने के लिए
आया हैं सरहद पे जवाँ , मीट जाने के लिए
देश की खातिर, सब अपना लुटा देने के लिए ... ( 2 )
सीना तान खड़ा वो जम कर, डरने का कहीं नाम नहीं
बारूद और आग के बीचमें, और कोई अंजाम नहीं,
कब से जाने किस्मतको, रूठ जाने के लिए
लड़ रहा हैं फिर भी वो, देश बचाने के लिए ...
आया हैं सरहद पे जवाँ , मीट जाने के लिए
देश की खातिर, सब अपना लुटा देने के लिए ...सुन लो ए सियासत वालों, सुन लो तुम निगेहबानों,
बात नहीं बनती सिर्फ बातों से ये तुम भी जानो जानो
खून बहाना पड़ता हैं जीत जाने के लिए
देश का सर हर हाल में,बुलंद रखने के लिए....
आया हैं सरहद पे जवाँ , मीट जाने के लिए
देश की खातिर, सब अपना लुटा देने के लिए ...
बंध करो ये लडाई जगड़े, कौन हैं हिन्दू कौन मुसलमान
जिस के दिल में प्यार मुहोब्बत वो कहलायेगा एक इंसान
बाकी कुछ ना मैं जानू , खुश रेहने के लिए,
जाऊंगा सरहद पे मैं, कुर्बानी के लिए ....
आया हैं सरहद पे जवाँ , मीट जाने के लिए
देश की खातिर, सब अपना लुटा देने के लिए ... ( 2 )
-- Composed by कमलेश भट्ट
In Memory of each and every soldier
Dying on the Border.
-- Composed by कमलेश भट्ट
In Memory of each and every soldier
Dying on the Border.
Saturday, January 14, 2017
Jhindagi ne Jhindagi bhar gham diye .... from " The Train "
' झिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए ,
जितने भी मौसम दिए सब नम दिए '..... ( 3 )
जब तड़पता हैं कभी अपना कोई,
खून के आसूँ रुला दे बेबसी ( 2 )
जी के फिर करना क्या मुझको ऐसी झिंदगी .... ( 2 )
जिसने झखमों को नहीं मरहम दिए
झिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए ....
झिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए ,
जितने भी मौसम दिए सब नम दिएअपने भी पेश आएं हमसे अजनबी
वख्त की साझिश कोई समझा नहीं ( 2 )
बे-इरादा कुछ खतायें हमसे हो गयी
राह में पत्थर मेरी हरदम दिए
झिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए,
जितने भी मौसम दिए सब नम दिएझिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए ....
' इक मुकम्मल कश्मकश हैं झिंदगी
उसने हमसे की कभी ना दोस्ती ' ( 2 )
जब मिली मुझको आसूं के वो तौफे दे गयी
हस सके हम ऐसे मौके कम दिए (2 )
झिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए ,
जितने भी मौसम दिए सब नम दिए ....
आ आ आ आ आ ( 4 )
आ आ आ
आ आ आ आ आ ( 2 )
आ आ आ
झिंदगीने झिंदगी भर ग़म दिए.....
Wednesday, December 21, 2016
The Eternal Traveller
The Eternal Traveller
===============
I love to travel on those huge highways,
And reside cooly in my magical memories,
Oh my country !! May you remain happy forever,
As I dwell in my blessed beautiful journeys....
The skin got burnt so much in scorchy sunny heat
That I became a shadow of myself and never knew
When in a small space of the skies, I went to sleep
And earned my bread from passers-by, however few.
As the land flows swiftly below my flying legs when I drive
Never looking back at any destination that is once gone
Day and night on the roads, as I strive and thrive,
And watch evenings and colorful cities of every zone.
Then came an evil time, the dwellings got demolished
All the nests too were shattered with no mercy and no pity
Whilst coming to the residencies, the roads also turned,
But wherever I stay, promise, I will turn that into a city.
I love to travel on those huge highways,
And reside cooly in my magical memories,
Oh my country !! May you remain happy forever,
As I dwell in my blessed beautiful journeys....
- KAMLESH BHATT.
राहों पे रेह्ते हैं
==========
राहों पे रेह्ते हैं, यादों पे बसर करते हैं,
==========
राहों पे रेह्ते हैं, यादों पे बसर करते हैं,
खुश रहो एह्ले वतन, हम तो सफ़र करते हैं……
जल गये जो धूप में तो साया हो गये,
आस्मां का कोई कोना थोडा सो गये,
जो गुज़र जाती हैं बस,
उसपे गुज़र करते हैं l
राहों पे रेह्ते हैं…
उड़ते पैरों के तले जब बेह्ती हैं ज़मीं,
मूडके हमने कोई मंज़िल देखी ही नहीं,
रातदिन राहों पे हम शामो-शहर करते हैंl
राहों पे रेह्ते हैं……
ऐसे उजडे आशियानें तिनके उड़ गयें,
बस्तियों तक आते आते रस्ते मूड गये,
हम ठेहर जायें जहा, उसको शहर करते हैंl
राहों पे रेह्ते हैं, यादों पे बसर करते हैं,
खुश रहो एह्ले वतन, हम तो सफ़र करते हैं……
-- गुलज़ार
Sunday, August 21, 2016
मेरा कुछ सामान !!
================
मेरा कुछ सामान
==============
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा हैं,
सावन के कुछ भीगें भीगें दिन रखे हैं,
और मेरे इक खतमें लिपटी रात पडी हैं,
वो रात बुजा दो, मेरा वो सामान लौटा दो.....
पतज़ड में कुछ पत्तोकी गिरने की आहट
कानों में इकबार पेहनके लौट आई थी,
पतज़ड की वो शाख अभी तक कांप रही हैं
वो शाख गिरा दो, मेरा वो सामान लौटा दो.....
इक अकेली छत्तरी में जब आधे आधे भीग रहें थे,
आधे सूखे आधे गीले सूखा तो मैं ले आयी थी,
गीला मन शायद बिस्तरके पास पड़ा हो,
वो भीजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो....
एकसो सोलाह चाँदकी रातें, एक तुम्हारें कांधे कांटे,
धीमी महकी थी खूश्बू, जुठ मुठ के शिकवें कुछ,
जुठ मुठ के वादें भी सब याद करा दूँ ,
सब भीजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो.....
एक ईजाज़त दे दो बस, जब इसको दफ्नाऊंगी,
मैं भी वही सो जाऊंगी, मैं भी वही सो जाऊंगी।
* # * # * # * # * # * # *
Subscribe to:
Comments (Atom)


